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धूमधाम से मनाई जा रही है महाशिवरात्रि, 21 साल बाद बना है ऐसा संयोग

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महाशिवरात्रि, शिव मंदिर, 21 साल बाद बना संयोग, भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक

देशभर में आज धूमधाम से महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जा रहा है। सुबह से ही शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। शिवालयों को फूल-मलाओं से सजाया गया है। शिव भक्त मंदिरों में बेलपत्र और कच्चे दूध से भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने सुबह से ही लाइन में लगे हुए है।

इस साल दो दिन मनाई जाएगी महाशिवरात्रि

21 साल बना संयोग

इस साल महाशिवरात्रि दो दिन तक (13 व 14 फरवरी) मनेगी। साथ ही प्रदोष भी मनेगा। ऐसा संयोग 21 साल बाद आया है। अलग-अलग पंचांग में महाशिवरात्रि अलग-अलग दिन है।

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पंडितों के अनुसार रात 10.21 बजे से चतुर्दशी शुरू हो जाएगी। इसलिए 12.08 मिनट पर 1.20 मिनट तक निशीथ काल महारात्रि होगी। इसके साथ ही 21 साल बाद यह अद्भुत संयोग बन रहा है। महाशिवरात्रि के साथ ही प्रदोष भी बनेगा। वहीं 14 फरवरी को रात 12.11 बजे चतुर्दशी समाप्त हो जाएगी।

महाकाल की भस्म आरती

मध्यप्रदेश के उज्जैन महाकाल मंदिर में भोलनाथ को सजाया गया है। महाकाल की भस्मा आरती की गई। सुबह से महाकाल के दर्शन के लिए भक्त लाइन में लगे हुए हैं। भोलनाथ के जयकारों से मंदिर गूंज रहा है। वहीं, पुणे के भीमाशंकर मंदिर में भी शिवभक्तों का तांता लगा हुआ है। पूरा वातावरण भक्तिमय हो रखा है। चारों दिशाओं से भगवान शिव के जयकारे सुनाई दे रहे हैं। छत्तीसगढ़ में महाशिवरात्रि के मौके पर श्रद्धालुओं ने रजिम कुंभ में महानदी नदी में लगाई आस्था की डुबकी लगाई

महाशिवरात्रि को भगवान शिव की पूजा करने का सबसे बड़ा दिन माना जा रहा है। मान्यता है कि इस दिन अगर भोलनाथ को खुश कर लिया, तो आपके सभी बिगड़े काम सफल हो जाते हैं लेकिन इस बार शिवभक्तों को भोलनाथ को खुश करने के दो अवसर मिल रहे हैं। क्योंकि इस बार शिवरात्रि दो दिन मनाई जा रही है।

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13 फरवरी यानी आज की रात 10 बजकर 35 मिनट पर चतुर्दशी तिथि का शुभारंभ होगा। वहीं, 14 फरवरी की रात 12 बजकर 46 मिनट तक चतुर्दशी रहेगी। ऐसे में दोनों ही दिन श्रद्धालु भोलेनाथ का जलाभिषेक कर सकते हैं।

शिव पूजन का महत्व

महाशिवरात्रि में शिव पूजन का विशेष महत्व है। अभिषेक, ओम नम: शिवाय मंत्र का जाप किया जाता है। हर मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को शिवरात्रि मनाते हैं। वहीं फाल्गुन कृष्ण पक्ष चतुर्दशी को महाशिवरात्रि मनाते हैं।

क्या है मान्यता

मान्यता है कि यदि शिव को सच्चे मन से याद कर लिया जाए तो शिव प्रसन्न हो जाते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि के दिन भगवान शंकर का माता पार्वती के साथ विवाह हुआ था। हिंदू मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि साल के अंत में आती है इसलिए इस दिन पूरे वर्ष में हुई गलतियों के लिए भगवान शंकर से क्षमा याचना की जाती है और आने वाले वर्ष में उन्नति एवं सदगुणों के विकास के लिए प्रार्थना की जाती है।

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शिव भक्त पूर्ण श्रद्धा और भक्ति के साथ इस दिन भोलेनाथ की विशेष पूजा, अर्चना और स्तवन करते हैं।  भारत के अलग अलग प्रदेशों में स्थापित 12 ज्योतिर्लिंगों पर इस दिन हजारों भक्त जलाभिषेक कर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान से प्रार्थना करते हैं।

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