भारतीय स्टेट बैंक (SBI) ने अनुमान जताया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दिवाली जीएसटी तोहफ़े यानी कर दरों में कटौती के बावजूद राज्य सरकारें इस वित्त वर्ष में नेट गेनर रहेंगी।
एसबीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, जीएसटी से वसूले हर ₹100 में से राज्यों को लगभग ₹70.5 मिलते हैं। बैंक का अनुमान है कि राज्यों को FY26 में कम से कम ₹10 लाख करोड़ एसजीएसटी और ₹4.1 लाख करोड़ टैक्स डिवॉल्यूशन से मिलेंगे।
राज्यों की चिंता और एसबीआई का जवाब
आठ विपक्षी शासित राज्यों ने आशंका जताई थी कि टैक्स कटौती से उन्हें ₹2 लाख करोड़ तक का नुकसान हो सकता है। उन्होंने मुआवज़ा और सिन गुड्स पर अतिरिक्त टैक्स की मांग की।
लेकिन एसबीआई ने कहा कि पहले भी दरों में कटौती (2018 और 2019) के बाद राजस्व में अस्थायी गिरावट आई थी, पर जल्दी ही रिकवरी हो गई।
संभावित बदलाव
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12% वाले सामान (डेयरी, जूस, कपड़े, जूते) → 5%
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28% वाले सामान (सीमेंट, टीवी, एसी) → 18%
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लग्ज़री कारें → नया 40% रेट
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छोटी कारें और 350cc तक की बाइक → 18%
एसबीआई का सुझाव
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दरों का सरलीकरण दीर्घकालिक राजस्व और दक्षता बढ़ाएगा।
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पेट्रोल, बिजली और एटीएफ को जीएसटी में लाने की तैयारी होनी चाहिए।
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पंजीकरण और रिफंड में टेक्नोलॉजी व प्री-फिल्ड रिटर्न का इस्तेमाल बढ़ाया जाए।
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इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर की समस्या भी हल की जानी चाहिए।
एसबीआई का मानना है कि जीएसटी सुधार को अल्पकालिक रियायत नहीं बल्कि दीर्घकालिक कर संरचना सुधार के रूप में देखा जाए। इससे कर आधार बढ़ेगा और राज्यों को अंततः फ़ायदा होगा।