अनुपर्णा रॉय को मिला बेस्ट डायरेक्टर अवॉर्ड – Songs of Forgotten Trees ने रचा इतिहास

भारतीय सिनेमा के लिए गौरव का क्षण तब आया जब पश्चिम बंगाल के पुरुलिया की युवा फिल्ममेकर अनुपर्णा रॉय ने वेनिस अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में बेस्ट डायरेक्टर का प्रतिष्ठित सम्मान अपने नाम किया। उनकी पहली फीचर फिल्म Songs of Forgotten Trees को इस साल के महोत्सव की Orizzonti (Horizons) श्रेणी में प्रदर्शित किया गया था। इस उपलब्धि के साथ अनुपर्णा रॉय इस श्रेणी में पुरस्कार जीतने वाली पहली भारतीय निर्देशक बन गईं।

यह फिल्म मुंबई में रहने वाली दो प्रवासी महिलाओं की संवेदनशील कहानी कहती है, जो शहर की आपाधापी और कठिनाइयों के बीच दोस्ती और सहारे का रिश्ता तलाशती हैं। फिल्म यह दिखाती है कि कैसे संघर्ष, अकेलापन और विस्थापन के बीच इंसानी रिश्ते उम्मीद की किरण बन जाते हैं। अनुपर्णा का कहना है कि यह फिल्म उन सभी महिलाओं को समर्पित है जिन्हें अक्सर समाज में अनसुना और अनदेखा कर दिया जाता है।

पुरस्कार ग्रहण करते समय अनुपर्णा रॉय बेहद भावुक नज़र आईं। उन्होंने अपनी टीम, सहयोगियों और दर्शकों का धन्यवाद करते हुए कहा कि यह पल उनके लिए सपने के सच होने जैसा है। सफेद साड़ी में मंच पर खड़ी अनुपर्णा ने न सिर्फ भारतीय सिनेमा को सम्मान दिलाया, बल्कि दुनिया को यह भी दिखाया कि नई पीढ़ी की महिला निर्देशक किस तरह साहसिक और संवेदनशील कहानियां सामने ला रही हैं।

अपने स्वीकृति भाषण में अनुपर्णा ने फ़िलिस्तीन के बच्चों का जिक्र करते हुए कहा कि हर बच्चे को शांति और स्वतंत्रता का अधिकार है। उन्होंने यह भी कहा कि कला केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि समाज की सच्चाइयों को सामने लाने का माध्यम भी है। उनकी यह बात वहां मौजूद दर्शकों के दिलों को छू गई।

अनुपर्णा का यह सफर आसान नहीं रहा। अंग्रेज़ी साहित्य की पढ़ाई के बाद उन्होंने कई कॉरपोरेट नौकरियां कीं, लेकिन फिल्मों के प्रति उनके जुनून ने उन्हें कैमरे के पीछे खड़ा कर दिया। उनकी पहली ही फीचर फिल्म ने अंतर्राष्ट्रीय मंच पर ऐसा असर डाला कि भारतीय सिनेमा को नया गौरव मिल गया।

यह जीत केवल अनुपर्णा रॉय की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है, बल्कि भारतीय सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक क्षण है। इसने साबित कर दिया है कि भारतीय फिल्मकार अब केवल पारंपरिक कहानियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सामाजिक, मानवीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी गहरी पकड़ रखते हैं। अनुपर्णा की इस सफलता ने युवा कलाकारों और खासकर महिला फिल्ममेकर्स को आगे बढ़ने का नया हौसला दिया है।

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