
लखनऊ। उप्र विधानसभा का बजट सत्र चल रहा है। तमाम मुद्दों के बीच इस समय के सबसे ज्वलंत मुद्दे केन्द्रीय कृषि कानूनों को लेकर विधानसभा के दोनों सदनों में सत्ता पक्ष व विपक्ष के बीच गर्मागर्म बहस हुई।
विपक्षी सदस्यों ने जहां एक तरफ इस कानून को किसानों के साथ धोखा बताते हुए इसे वापस लेने की मांग की वहीँ सत्ताधारी दल भाजपा के सदस्यों ने इसे किसानों के लिए बहुत लाभदायक बताया। सदन में हुई चर्चा के दौरान कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने जवाब दिया।
उच्च सदन विधान परिषद् में भाजपा के नव-निर्वाचित सदस्य व पूर्व वरिष्ठ आइएएस अधिकारी अरविंद कुमार शर्मा ने सदन में पहली बार दिए अपने वक्तव्य में विपक्षी दलों को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जिस एमएसपी व एपीएमसी को ख़तम करने की बात कही जा रही है, इन कानूनों में उनका कहीं उल्लेख ही नहीं है।
भारी शोरगुल व हंगामे के बीच कानूनों की कॉपी को सदन में दिखाते हुए अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि जब हमसे भी बड़ी व इस देश के सबसे उच्च सदन लोकसभा व राज्यसभा ने घंटों बहस करने के बाद इस कानून को पारित किया है तो क्या हमें उनके ऊपर भी विश्वास नहीं है?

अरविंद कुमार शर्मा ने कहा मैं स्वयं किसान हूँ और खेती करता हूँ. अभी अपने गाँव किसानों के बीच होकर आया हूँ, जो यह बात कही जा रही है कि किसानों की स्थिति पिछले जून या सितंबर में जबसे यह कानून पास हुआ है तभी से खराब हो गई तो क्या किसानों की स्थिति पहले बहुत अच्छी थी? पिछले 60 सालों से किसानों की क्या स्थिति थी?
कृषि को लेकर अपनी स्मृतियां सदन से साझा करते हुए अरविंद कुमार शर्मा ने कहा जब मैं एम.ए. में पढता था मेरे यहाँ के आलू को कोल्ड स्टोरेज में जमा करने के लिए दो-दो तीन-तीन दिन तक लाइन लगानी पड़ती थी, बावजूद इसके जब बिजली चले जाने से आलू सड़ जाता था तो उसका कोई मुआवजा नहीं मिलता था। इस कानूनों में तो इन सभी बातों का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा कि किसानों को इन कानूनों से कोई दिक्कत नहीं है, दिक्कत बस कुछ लोगों को यह है कि मोदी आवास देकर लोगों के घर तक पहुँच गए, बिजली देकर प्रकाश के रूप में लोगों के दिलों तक पहुँच गए, गैस सिलेंडर देकर लोगों की रसोई तक पहुँच गए।
देश की अर्थव्यवस्था को लेकर एक विदेशी अर्थशास्त्री के लिखे आंकड़ों का जिक्र करते हुए अरविंद कुमार शर्मा ने कहा कि सन 1700 ई. में विश्व की जीडीपी में भारत की हिस्सेदारी 24 प्रतिशत थी जो अंग्रेजों व मुगलों की सत्ता से होते हुए 1953 में 03 प्रतिशत पहुँच गई। क्या पिछली सरकारों का यह फर्ज नहीं बनता था कि इसे बढ़ाकर 13 प्रतिशत या 23 प्रतिशत या उससे भी आगे ले जाएं?

उन्होंने कहा कृषि कानूनों को लेकर भ्रम फैलाया जा रहा है। किसानों को इससे सिर्फ फायदा ही होगा, वह अपनी उपज कहीं भी बेच सकता है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग में भी सब कुछ किसानों के ही हाथ में है। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत निर्यात पर रोक को लेकर सरकारों के हाथ भी इस कानून से बांधे गए है, जिसका लाभ भी किसानों को ही मिलेगा।