पंजाब में आई हालिया बाढ़ ने राज्य को गहरे संकट में धकेल दिया है। लगातार बारिश और नदियों में आई बाढ़ से न केवल गांव डूब गए बल्कि शहरों में भी जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। हजारों घर क्षतिग्रस्त हुए, लाखों लोग बेघर हो गए और कृषि क्षेत्र को भारी नुकसान पहुंचा है। इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 सितंबर को पंजाब का दौरा करेंगे। उनके दौरे से राज्य को बड़ी राहत की उम्मीदें बंध गई हैं।
राज्य की बड़ी मांग: ₹20,000 करोड़ पैकेज
पंजाब सरकार ने केंद्र से ₹20,000 करोड़ रुपये का राहत पैकेज मांगा है। राज्य सरकार का कहना है कि बाढ़ से सड़कें, पुल, स्कूल, अस्पताल और बिजली तंत्र जैसे बुनियादी ढांचे को भारी क्षति पहुंची है। इसके अलावा, धान और अन्य फसलों की पूरी पैदावार लगभग खत्म हो चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतनी बड़ी तबाही से निपटने के लिए केंद्र की मदद बेहद ज़रूरी है।
किसानों की हालत गंभीर
किसानों पर इस बाढ़ का सबसे ज़्यादा असर पड़ा है। कई इलाकों में किसानों की साल भर की मेहनत एक झटके में बह गई। अब उन्हें न केवल आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है बल्कि कर्ज़ चुकाना भी मुश्किल होता जा रहा है। किसान संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकार से फसल मुआवज़े की प्रक्रिया तुरंत शुरू करने की मांग की है।
आम जनता की मुश्किलें
गांवों में लोगों को पीने के पानी, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं का संकट झेलना पड़ रहा है। कई इलाकों में अभी भी पानी जमा है जिससे महामारी फैलने का खतरा बढ़ गया है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं लेकिन प्रभावित इलाकों में अभी भी बड़ी संख्या में लोग सहायता का इंतजार कर रहे हैं।
पीएम मोदी का दौरा और केंद्र की भूमिका
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 9 सितंबर को पंजाब का दौरा करेंगे। वे बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण कर सकते हैं और स्थानीय प्रशासन से बातचीत करेंगे। केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि पीएम की रिपोर्ट के आधार पर राहत पैकेज पर फैसला किया जाएगा। उम्मीद की जा रही है कि पीएम मोदी के दौरे के बाद विशेष आर्थिक सहायता का ऐलान हो सकता है।
राजनीतिक महत्व
यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। राज्य सरकार और केंद्र के बीच बेहतर तालमेल राहत कार्यों को तेज़ कर सकता है। विपक्षी दल भी केंद्र सरकार पर दबाव बना रहे हैं कि बाढ़ प्रभावितों को तुरंत आर्थिक सहायता दी जाए।