
लखनऊ। मजदूर मसीहा स्व.टीएन वाजपेयी की पुण्यतिथि पर आज नार्दर्न रेलवे मेन्स यूनियन कारखाना मंडल द्वारा आयोजित तकनीकी कर्मचारी सम्मेलन संपन्न हुआ।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सांसद रीता जोशी बहुगुणा ने कहा कि आज भारतीय रेल मजबूत है, इसीलिए देश मजबूत है। श्रीमती जोशी ने कहा कि वो स्वयं कर्मचारियों की बात सरकार तक पहुंचाने और बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करेंगी।
रीता जोशी बहुगुणा ने कहाकि मेरे पिता जी श्रमिक आंदोलन से निकले नेता थे, उन्हें मजदूरों के दर्द का अहसास था। मैं उन्हीं की बेटी हूं और पूरी कोशिश होगी कि मजदूरों के साथ किसी तरह का अन्याय न हो।
श्रीमति जोशी ने कहा कि सही मायने में भारतीय रेल हमारी देश की जान है। भारतीय अर्थव्यवस्था को पटरी पर रखने में रेलवे का अहम रोल है।
सांसद ने कहा कि मैं रेल श्रमिकों को तकलीफ में नहीं देख सकती, उन्होने कहा कि वो कर्मचारियों की मांग को न सिर्फ सही जगह पहुंचाने का काम करेंगी, बल्कि समस्या के समाधान को मध्यस्थता करने को भी तैयार हैं।
उन्होने कहा कि कोई ऐसा विषय नहीं है तो बातचीत से न निपटाया जा सके, ये समस्या भी बात चीत से सुलझ जाएगी।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए आल इंडिया रेलवे मेन्स फैडरेशन के महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा ने केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला और कहा कि आज सरकार से मजदूरों का भरोसा खत्म हो रहा है, क्योंकि प्रधानमंत्री, रेलमंत्री संसद और सभाओं में दावा करते हैं कि भारतीय रेल का निजीकरण नहीं होगा, लेकिन उनका हर काम भारतीय रेल को निजीकरण की ओर ले जाने वाला है।
महामंत्री ने रेलकर्मियों से कहा कि हमें रेल को बचाने के लिए जान की बाजी लगानी पड़ी तो भी पीछे हटने वाले नहीं है। महामंत्री ने रेल अप्रेंटिस को भारतीय रेल की रीढ़ की हड्डी बताते हुए कहाकि इनके समायोजन को लेकर 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी धरना तो दिया ही जाएगा, फिर सरकार ने प्रभावी कार्रवाई नहीं की तो इस मसले पर भी बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
को एआईआरएफ महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा और सांसद रीता जोशी बहुगुणा संबोधित कर रही थी।
महामंत्री ने कहाकि आज सरकार से मजदूर और किसानों का भरोसा ही खत्म हो गया है, क्योंकि सरकार कहती कुछ है और करती कुछ और ही है। रेलमंत्री ही नहीं खुद प्रधानमंत्री ने कहाकि भारतीय रेल का निजीकरण नहीं होगा, लेकिन आज न सिर्फ प्राईवेट पार्टनर के जरिए ट्रेन चलाने की साजिश की जा रही है, बल्कि उत्पादन इकाइयों और कारखानों में ज्यादातर काम आउट सोर्स किए जा रहे हैं। अब रेलवे स्टेशन तक की देखरेख प्राईवेट हांथों में दिए जा रहे हैं।
मिश्रा ने कहा कि खून पसीना बहाकर भी हम ट्रेन चलाने के लिए तैयार है, लेकिन सरकार ने अगर रेल को बेचने की साजिश की तो हर हाल में भारतीय रेल का चक्का जाम होगा।
महामंत्री ने याद दिलाया कि कोरोना महामारी के बीच जब रेलकर्मचारी देश की सेवा में लगे हुए थे, वो विपरीत हालातों में भी ट्रेनों का संचालन कर आवश्यक उपभोक्ता वस्तुओं की आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे थे, उस समय सरकार इन कर्मचारियों की पीठ थपथपाने के बजाए पीठ में छूरा घोंपने का काम कर रही थी।
सरकार ने पहले डीए पर रोक लगाया, फिर नाइट ड्यूटी एलाउंस को रोका, तमाम तरह के एलाउंस और ओवर टाइम रोके गए। महामंत्री ने कहाकि मंहगाई भत्ता कोई चैरिटी नहीं है, सरकार मंहगाई रोकने का दावा करे, हम मंहगाई भत्ता नहीं लेंगे, लेकिन एक ओर मंहगाई आसमान छूती जा रही है और सरकार मंहगाई भत्ते पर कैंची चला रही है।
महामंत्री ने कहाकि एक ओर प्रधानमंत्री रेल कर्मचारियों को फ्रंट लाइन कोरोना वारियर्स बताते है, वहीं जब सुविधाएं देने की बात होती है तो खामोश हो जाते हैं। ऐसे में सरकार की नीयत पर ही शक होता है।
महामंत्री ने चेताया कि सरकार एआईआरएफ की ताकत नहीं जानती, सरकार को टकराव का रास्ता अपनाने से पहले एआईआरएफ के इतिहास को जानना चाहिए, हमने भारतीय रेल में तीन हड़तालें की और तीनों में जीत हासिल की है।
महामंत्री कहा कि चुनौती जितनी बड़ी होती है, तैयारी उतनी ही मजबूत होनी चाहिए, इसलिए हमने एक बार फिर सभी को साथ लेकर एनसीसीआरएस का गठन किया है, भारतीय रेल के निजीकरण के खिलाफ एनसीसीआरएस में सभी एकराय है और संघर्ष का फैसला कर चुके हैं।
एआईआरएफ महामंत्री ने कहाकि आज भारतीय रेल के युवा कर्मचारी भविष्य को लेकर खुद असुरक्षित महसूस कर रहे हैं, इसलिए एनपीएस को हर हाल में वापस करना होगा, ये युवाओं के भविष्य का सवाल है। इस पर अब निर्णायक संघर्ष का समय आ गया है।
महामंत्री ने कहाकि कास्ट कटिंग के नाम पर मनमानी आदेश निकाले गए, जिसका समय-समय पर सख्त विरोध किया गया, महामंत्री ने कहाकि बिना लड़े कुछ भी मिलना संभव नहीं है, पुरानी पेंशन की बहाली को लेकर संसद के बजट सत्र के दौरान देश भर के कर्मचारी दिल्ली पहुंच कर संसद को घेरने का काम करेंगे। इसके बाद भी अगर बात नहीं सुनी गई तो रेल का चक्का जाम करने से भी हम पीछे नहीं रहने वाले हैं।
महामंत्री ने कारखानों के नेताओं और कर्मचारियों से कहाकि आपके सामने गंभीर चुनौती है, इसलिए आपको भी अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है।
उन्होने नेताओं से कहा कि वो कारखाना खुलने के आधे घंटे पहले पहुंचे और बंद होने के आधे घंटे बाद जाएं। कर्मचारियों को अपनी निर्धारित काम के घंटे तक कारखानों में ही रहना चाहिए। कारखाने के कर्मचारी भागने की आदत को पूरी तरह छोड़ें।

महामंत्री ने कहा कि कारखानों के भ्रस्टाचार पर भी आपको ही नजर रखने की जरूरत है, जहां भी देखें की करप्शन हो रहा है, वहां तुरंत आवाज बुलंद करें। कारखानों के कर्मचारियों को याद रखना होगा कि रेलवे के नुकसान का ठीकरा भी आखिर में आपके ही सिर पर फोडा जाएगा।
महामंत्री ने कहाकि एक्ट अप्रेंटिस के मुद्दे पर एआईआरएफ गंभीर है। इस सम्मेलन में बड़ी संख्या ऐसे लोग मौजूद है जो अप्रेंटिस करने के बाद नौकरी में आए है और ये काम एआईआरएफ ने कराया है।
महामंत्री ने अप्रेंटिस को भारतीय रेल का अभिन्न अंग और अमूल्य निधि बताते हुए कहाकि उनका हर हाल में रेल में समायोजन होना चाहिए। इसके लिए देश भर में 12 फरवरी को धरना दिया जाएगा, इसके बाद भी अगर बात नहीं सुनी गई तो एक बड़े आंदोलन की तैयारी की जाएगी।
सम्मेलन को वरिष्ठ नेता सियाराम वाजपेयी, जोनल महामंत्री एलएन पाठक, मंडल मंत्री आरके पांडेय, अरुण गोपाल मिश्रा, कारखाना अध्यक्ष किशन पहलवान, सीनियर डीएमई एके तिवारी, केंद्रीय उपाध्यक्ष एसयू शाह, शाखा सचिव मदन गोपाल मिश्रा, संजीव मिश्रा ने भी संबोधित किया। सम्मेलन के पूर्व यूनियन कार्यालय परिसर में महामंत्री शिवगोपाल मिश्रा, सांसद रीता जोशी बहुगुणा समेत यूनियन के तमाम नेताओं ने वृक्षारोपण किया।
मजदूर मसीहा स्व. टीएन वाजपेयी की पुण्यतिथि पर उनके चित्र पर पुष्पांजलि भी की गई। इतना ही नहीं टीएन वाजपेयी चौराहे पर आयोजित एक कार्यक्रम में तमाम नेताओं ने उन्हें याद किया और कहा कि उनके आदर्श आज भी जिंदा है और हम उनके रास्ते पर चल कर मजदूर हितों के लिए संघर्ष करते रहेंगे।