नेपाल इन दिनों गहरे राजनीतिक और सामाजिक उथल-पुथल से गुजर रहा है। हाल ही में काठमांडू और कई अन्य प्रमुख शहरों में व्यापक विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। इन प्रदर्शनों की वजह सरकार की नीतियों और बढ़ती महंगाई को माना जा रहा है। आम जनता से लेकर छात्र संगठनों तक, सभी ने सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ अपना आक्रोश जताया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार लगातार जनता की समस्याओं की अनदेखी कर रही है। पेट्रोल, डीजल, खाद्य पदार्थ और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने आम नागरिकों का जीना मुश्किल कर दिया है। साथ ही, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। छात्रों और युवाओं ने सरकार से पारदर्शिता और रोजगार सृजन की दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की।
काठमांडू में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प की घटनाएं भी सामने आईं। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और कई जगहों पर लाठीचार्ज करना पड़ा। कई प्रदर्शनकारी घायल हुए और कुछ को हिरासत में लिया गया। इसके बावजूद लोग डटे रहे और उन्होंने सरकार के खिलाफ नारेबाजी जारी रखी।
राजनीतिक दलों के भीतर भी असहमति की स्थिति बनी हुई है। विपक्षी दलों ने जनता के गुस्से को सही ठहराते हुए सरकार पर आरोप लगाया कि वह जनता की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और सरकार को जनता की मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
वहीं, सरकार का कहना है कि हालात पर नियंत्रण रखा जा रहा है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री ने लोगों से शांति बनाए रखने और समस्याओं का समाधान बातचीत के जरिए निकालने की अपील की। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, उन्हें जमीनी स्तर पर सुधार चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल का यह विरोध केवल आर्थिक असंतोष का परिणाम नहीं है, बल्कि यह जनता की उस गहरी नाराजगी को दर्शाता है जो लंबे समय से राजनीतिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार और धीमी विकास दर से जुड़ी हुई है। अगर सरकार ने समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए, तो यह विरोध और व्यापक रूप ले सकता है और देश की स्थिरता पर गंभीर असर डाल सकता है।
नेपाल में भड़के ये प्रदर्शन आने वाले दिनों में सरकार के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकते हैं। जनता अब ठोस बदलाव चाहती है और इसके लिए सड़कों पर उतरने से भी पीछे नहीं हट रही।