बीजिंग सैन्य परेड: रूस, उत्तर कोरिया और चीन की एकजुटता का नया संदेश

चीन अगले हफ़्ते बीजिंग में एक भव्य और ऐतिहासिक सैन्य परेड का आयोजन करने जा रहा है। इस आयोजन की खास बात यह है कि इसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और उत्तर कोरिया के सर्वोच्च नेता किम जोंग-उन भी मंच साझा करेंगे। यह पहली बार होगा जब ये तीनों नेता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक ही मंच पर एक साथ दिखाई देंगे।

यह परेड द्वितीय विश्व युद्ध (WWII) में जापान की हार की 80वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित की जा रही है। चीन इस अवसर को अपनी ऐतिहासिक उपलब्धियों और वर्तमान वैश्विक शक्ति संतुलन को प्रदर्शित करने का एक बड़ा मौका मान रहा है। परेड में आधुनिक हथियारों, मिसाइलों और उन्नत सैन्य तकनीकों का प्रदर्शन किया जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह आयोजन सिर्फ सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि इसका सबसे बड़ा उद्देश्य दुनिया को यह संदेश देना है कि चीन, रूस और उत्तर कोरिया एकजुट होकर पश्चिमी देशों और विशेषकर अमेरिका के दबाव का मुकाबला करने को तैयार हैं। तीनों देशों के बीच हाल के वर्षों में कूटनीतिक और आर्थिक रिश्ते गहरे हुए हैं। रूस पर लगे पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच चीन और उत्तर कोरिया उसके अहम सहयोगी बनकर उभरे हैं।

यह परेड ऐसे समय में हो रही है जब यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस और पश्चिम के बीच तनाव चरम पर है, वहीं अमेरिका और उसके सहयोगी देश एशिया-प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती गतिविधियों को लेकर चिंतित हैं। उत्तर कोरिया लगातार मिसाइल परीक्षण कर दुनिया का ध्यान खींच रहा है। ऐसे में तीनों नेताओं का एक साथ आना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में गहरे संकेत छोड़ता है।

परेड को लेकर जापान और अमेरिका ने पहले ही चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यह आयोजन एशिया-प्रशांत क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। लेकिन चीन, रूस और उत्तर कोरिया के लिए यह मित्रता और शक्ति प्रदर्शन का अवसर है, जो आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति के समीकरणों को बदल सकता है।

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