सीमा पर तनाव खत्म? भारत-चीन रिश्तों में उम्मीद की किरण

नई दिल्ली, 20 अगस्त 2025:
भारत और चीन, एशिया की दो प्रमुख शक्तियाँ, पिछले कुछ वर्षों से सीमा विवाद और व्यापार असंतुलन जैसे मुद्दों से जूझ रही थीं। लेकिन हाल ही में दोनों देशों ने अपने रिश्तों में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं, जो न केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेंगे, बल्कि क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता में भी योगदान देंगे।

सीधी उड़ानों की बहाली

भारत और चीन ने अपने नागरिक उड्डयन संबंधों को पुनर्जीवित करने का निर्णय लिया है। दोनों देशों के बीच सीधी उड़ानों की बहाली से व्यापार, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान में वृद्धि की उम्मीद है। यह कदम 2020 में सीमा विवाद के बाद से निलंबित उड़ानों को फिर से शुरू करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।

 कैलाश मानसरोवर यात्रा की पुनः शुरुआत

भारत और चीन ने कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने का निर्णय लिया है। यह यात्रा भारतीय श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा मानी जाती है, और इसके पुनः आरंभ से दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों में मजबूती आएगी।

सीमा विवाद पर प्रगति

भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों ने सीमा विवाद के समाधान के लिए नई पहल की है। दोनों देशों ने सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए नए तंत्र स्थापित करने पर सहमति जताई है। यह कदम 2020 में हुई हिंसक झड़पों के बाद से दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास की ओर इशारा करता है।

व्यापार असंतुलन पर विचार

हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में सुधार हो रहा है, लेकिन भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा चिंता का विषय बना हुआ है। भारत मुख्य रूप से चीन से तैयार माल आयात करता है, जबकि कच्चे माल का निर्यात करता है, जिससे व्यापार असंतुलन बढ़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत को अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम उठाने की आवश्यकता है।

 वैश्विक परिप्रेक्ष्य

अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए उच्च शुल्कों और वैश्विक व्यापार युद्ध के बीच, भारत और चीन के बीच बढ़ती साझेदारी को एक रणनीतिक कदम के रूप में देखा जा रहा है। दोनों देशों के बीच सहयोग से क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक विकास में योगदान की उम्मीद है।

भारत और चीन के बीच बढ़ती साझेदारी और सहयोग से न केवल द्विपक्षीय संबंधों में सुधार होगा, बल्कि यह क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता में भी योगदान देगा। हालांकि, व्यापार असंतुलन और सीमा विवाद जैसे मुद्दों पर सतत संवाद और सहयोग की आवश्यकता है।

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