रातभर बरसे मिसाइल और ड्रोन – यूक्रेन का आसमान आग में तब्दील

रूस-यूक्रेन युद्ध तेज़रूस और यूक्रेन के बीच छिड़ा युद्ध एक बार फिर खौफ़नाक मोड़ पर पहुँच गया है। बीती रात रूसी सेना ने यूक्रेन पर अब तक के सबसे बड़े हमलों में से एक को अंजाम दिया। करीब 40 मिसाइलें और 600 से अधिक ड्रोन दागे गए, जिनकी धमक सिर्फ यूक्रेन ही नहीं बल्कि पड़ोसी देशों तक भी सुनाई दी। हालात इतने गंभीर रहे कि पोलैंड को भी अपनी वायुसेना को अलर्ट मोड पर लाना पड़ा।

यह हमला एक बार फिर दुनिया को सोचने पर मजबूर कर रहा है कि आखिर यह युद्ध कब खत्म होगा और निर्दोष लोग कब तक इसकी कीमत चुकाते रहेंगे।

 सुमी में तबाही: बच्चों पर टूटा कहर

यूक्रेन के सुमी क्षेत्र का ओखतिरका शहर इस हमले से सबसे ज़्यादा प्रभावित हुआ। रूसी ड्रोनों की बरसात ने कम से कम 14 लोगों को घायल कर दिया, जिनमें 5 महीने का बच्चा और छोटे बच्चे भी शामिल हैं। सोचिए, मासूमों पर बरसते ये बम और ड्रोन कितनी गहरी चोट छोड़ रहे होंगे।

कुछ दिन पहले हुए एक अन्य हमले में 14 नागरिकों की मौत हो गई थी और 50 से अधिक लोग घायल हुए थे। ये घटनाएँ इस बात का सबूत हैं कि युद्ध अब सीधे नागरिकों को निशाना बना रहा है।

 ज़ेलेंस्की का सख्त संदेश

यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर ज़ेलेंस्की ने एक बार फिर साफ कहा है कि उनका देश किसी भी सूरत में रूसी कब्ज़े को स्वीकार नहीं करेगा। उनका आरोप है कि मास्को लगातार शांति वार्ता से बच रहा है और यदि यह रवैया जारी रहा तो अमेरिका और पश्चिमी देशों को रूस पर और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

ज़ेलेंस्की का यह बयान यूक्रेनियों में उम्मीद जगाता है, लेकिन साथ ही यह भी साफ करता है कि संघर्ष अभी जल्दी खत्म होने वाला नहीं है।

 शांति की राह धुंधली

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धविराम (Ceasefire) की संभावनाएँ बेहद कमज़ोर पड़ती दिख रही हैं। अमेरिका की बदलती नीतियाँ, यूरोप की सुरक्षा चिंताएँ और रूस के विस्तारवादी इरादे इस संघर्ष को और लंबा खींच रहे हैं।

आज स्थिति यह है कि यह युद्ध सिर्फ दो देशों का नहीं रह गया है। इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ रहा है—ऊर्जा संकट, खाद्यान्न की कमी और वैश्विक बाज़ारों में अस्थिरता इसके गवाह हैं।

हर नया हमला, हर नया धमाका इस युद्ध की क्रूरता को और उजागर कर रहा है। मासूमों की जानें जा रही हैं, शहर मलबे में बदल रहे हैं और शांति की उम्मीद दिन-ब-दिन धूमिल होती जा रही है। सवाल यह है कि दुनिया कितने समय तक केवल तमाशबीन बनी रहेगी और कब कोई ठोस समाधान सामने आएगा?

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