भारत ने अपने सशस्त्र बलों को भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करने हेतु एक महत्वाकांक्षी 15 वर्षीय रक्षा आधुनिकीकरण योजना जारी की है। इस रणनीति में परमाणु-संचालित युद्धपोत, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित हथियार, लेज़र और हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम को शामिल किया गया है। योजना का उद्देश्य है कि भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना को अत्याधुनिक तकनीक से लैस कर उन्हें 2040 तक विश्वस्तरीय शक्ति बनाया जाए।
नौसेना (Navy) की बड़ी छलांग
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तीसरा परमाणु-संचालित एयरक्राफ्ट कैरियर और स्वदेशी नौसैनिक लड़ाकू विमान।
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10 न्यूक्लियर प्रोपल्शन सिस्टम और अगली पीढ़ी के विध्वंसक (Destroyers) व फ्रिगेट्स।
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इलेक्ट्रोमैग्नेटिक एयरक्राफ्ट लॉन्च सिस्टम (EMALS) और एडवांस टॉरपीडो।
थलसेना (Army) की आधुनिक तैयारी
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1,800 फ्यूचर मेन बैटल टैंक और 300-400 हल्के टैंक।
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50,000 एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें।
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700 से अधिक रोबोटिक IED निष्क्रिय करने वाले सिस्टम।
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आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित निगरानी और साइबर सुरक्षा उपकरण।
वायुसेना (Air Force) का हाई-टेक रोडमैप
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75 हाई-एल्टीट्यूड प्स्यूडो सैटेलाइट्स (HAPS)।
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150 स्टेल्थ ड्रोन और 100+ रिमोट पायलटेड एयरक्राफ्ट।
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10–15 हाई-एनर्जी लेज़र सिस्टम और हाई-पावर माइक्रोवेव हथियार।
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स्पेस आधारित निगरानी और हाइपरसोनिक मिसाइलें।
त्रि-सेना (Tri-Services) की संयुक्त दृष्टि
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500 से अधिक हाइपरसोनिक मिसाइल सिस्टम।
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क्वांटम-सुरक्षित संचार प्रणाली।
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स्पेस वॉरफेयर और उपग्रह आधारित सैन्य क्षमताएँ।
रणनीतिक महत्व
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह योजना भारत को केवल क्षेत्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक मजबूत सैन्य शक्ति के रूप में स्थापित करेगी। यह चीन और अमेरिका जैसी बड़ी शक्तियों के उन्नत सैन्य कार्यक्रमों का संतुलन बनाने की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, यह योजना “मेक इन इंडिया” और आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत घरेलू उत्पादन और स्वदेशी तकनीक को प्राथमिकता देती है, ताकि विदेशी आयात पर निर्भरता कम की जा सके।