रात 7–8 सितंबर की रात दक्षिण आकाश ने एक अद्भुत दृश्य का उपहार दिया — एक दुर्लभ पूर्ण चंद्र ग्रहण, जिसे आमतौर पर “Blοοd Moon” यानी रक्त चंद्रमा कहा जाता है। इस खगोलीय चमत्कार ने भारत और आसपास के कई देशों में आकाश को गहरे लाल रंग में रंगा दिया, जिसने प्रकृति प्रेमियों और खगोल विशेषज्ञों को स्तब्ध कर दिया।
घटना की विशेषताएँ और वैज्ञानिक कारण
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यह वर्ष का दूसरा और सबसे लंबा पूर्ण चंद्र ग्रहण था, जिसकी पूर्णता की अवधि लगभग 82 मिनट रही — एक दुर्लभ लम्बा क्षण जब चंद्रमा गहरा लाल नजर आता है।
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वैज्ञानिकों के अनुसार, इस लालिमा का कारण पृथ्वी के वायुमंडल द्वारा सूर्य के प्रकाश का फिल्टर होना है, जहां नीली किरणें बिखर जाती हैं और लाल प्रकाश चंद्रमा तक पहुँचता है — यह वही प्रक्रिया है जो सूर्यास्त को लाल रंग देती है।
जनता, उत्सुकता और सांस्कृतिक प्रतिबद्धता
समूची भारतवर्ष में लोग खुले आसमान की ओर ताके हुए थे — किसी को दूरबीन की आवश्यकता तक नहीं पड़ी, बस आंख उठाकर देखना काफी था।
हैदराबाद में नगरवासियों ने लाल चंद्रमा को देखकर रोमांचित होकर मोबाइल कैमरों में कैद किया, तो वहीं देहरादून में विज्ञान केंद्र के बाहर छात्रों और खगोलशास्त्रियों ने मिलकर इस दृश्य की वैचारिक और वैज्ञानिक झलक का आनंद लिया
पारंपरिक पहलू और आस्था
चंद्र ग्रहण का हिन्दू संस्कृति में विशेष महत्व है। इससे जुड़ी परंपराएं, जैसे सूतक काल (Sutak Kaal) — ग्रहण से पहले का समय जब कुछ गतिविधियों पर पाबंदी होती है — इसके आध्यात्मिक प्रभाव को दर्शाती हैं।
दूसरी ओर, इस चंद्र ग्रहण ने लोगों में भावनात्मक गहराई और रूमानी संवेदनाओं को भी उत्तेजित किया — क्योंकि पूर्णिमा और ग्रहण दोनों को भावनाओं पर असर डालने वाला माना जाता है।
मिथक और त्रुटिपूर्ण धारणाओं का खंडन
चंद्र ग्रहण को लेकर कई भ्रांतियाँ फैली होती हैं — जैसे कि इससे आँख खराब हो सकती है, या यह गर्भवती महिलाओं के लिए हानिकारक है आदि। विशेषज्ञों ने खंडन किया है कि ये बातें वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित नहीं हैं, और यह सुरक्षित रूप से आंखों से देखा जा सकता है।
अगले अवसर की घोषणा
भारत में यह पहला Blood Moon पूर्ण चंद्र ग्रहण था जो पूरे देश में दिखाई दिया — 2018 के बाद। अगली बार इसका दोबारा दीदार भारतीय आकाश में 31 दिसंबर, 2028 को होगा।
संक्षेप में:
एक रात जब चंद्रमा ने गहरी लाली ओढ़ी, 82 मिनट तक आसमान में हमें मंत्रमुग्ध कर दिया। वैज्ञानिक और सांस्कृतिक, दोनों रूपों में यह घटना यादगार रही — प्राकृतिक चमत्कार और आध्यात्मिक संवाद का संगम। भविष्य में इस अद्भुत आयोजन का फिर से इंतज़ार रहेगा।