जानिए कौन-से भारतीय फैशन ट्रेंड विदेशों में मचा रहे धूम

भारतीय फैशन आज दुनिया भर में ट्रेंड कर रहा है। साड़ी, लहंगा, कुर्ता और जूतियाँ विदेशी रैम्प वॉक्स और रेड कार्पेट पर भी दिखते हैं। बनारसी साड़ी, चिकनकारी कढ़ाई और बांधनी प्रिंट विदेशों में काफ़ी पसंद किए जाते हैं। बॉलीवुड और भारतीय त्योहारों ने भी इसे लोकप्रिय बनाया है। इंडो-वेस्टर्न स्टाइल ने भारतीय फैशन को और आधुनिक रूप में पेश किया है।

 

मद्रास चेक:

मद्रास चेक एक ऐसा फैशन ट्रेंड है जिसे अक्सर लोग वेस्टर्न समझ बैठते हैं, लेकिन इसकी शुरुआत भारत के मद्रास (अब चेन्नई) से हुई थी। हल्के कॉटन पर बने ये रंग-बिरंगे चौकोर पैटर्न असल में देसी हैं, जिन्हें अब दुनिया भर के ब्रांड्स अपनाते हैं। चाहे अमेरिकन समर शर्ट हो या इंटरनेशनल रनवे — ये ट्रेंड असल में भारतीय बुनकरों की कला का ही नतीजा है।

 

कम्बरबंद : 

कम्बरबंद एक चौड़ा कपड़े का पट्टा होता है, जिसे कमर पर बांधा जाता है। यह शब्द फ़ारसी और उर्दू से आया है और भारत में पारंपरिक पहनावे का हिस्सा रहा है। बाद में अंग्रेजों ने इसे औपचारिक पोशाक जैसे टक्सीडो के साथ अपनाया। इसमें सिलवटें ऊपर की ओर होती हैं और कभी-कभी इसका उपयोग छोटी वस्तुएँ रखने के लिए भी किया जाता था। आज यह फैशन और परंपरा दोनों का प्रतीक है।

 

कोल्हापुरी चप्पल:

कोल्हापुरी चप्पल महाराष्ट्र के कोल्हापुर ज़िले की पारंपरिक हाथ से बनी चमड़े की चप्पलें हैं। ये चप्पलें अपनी मज़बूती, आराम और आकर्षक डिज़ाइन के लिए प्रसिद्ध हैं। खासियत यह है कि इन्हें बिना किसी कील या धातु के, पूरी तरह चमड़े से बनाया जाता है। पहले ये प्राकृतिक रंगों और वनस्पति से रंगे चमड़े से तैयार होती थीं, जिससे ये पर्यावरण के अनुकूल भी रहती हैं। कोल्हापुरी चप्पल सिर्फ़ फुटवियर नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा की पहचान मानी जाती है। आज ये आधुनिक फैशन के साथ भी मेल खाती हैं और देश-विदेश में लोकप्रिय हैं।

बैंडाना :

बैंडाना की उत्पत्ति भारत से हुई है। इसका नाम हिंदी शब्द “बाँधना” से लिया गया है, जिसका अर्थ है बाँधना या लपेटना। सबसे पहले इसे राजस्थान और गुजरात में छपाई और रंगाई की पारंपरिक तकनीक से बनाया जाता था। बाद में यह यूरोप और अमेरिका तक पहुँचा और फैशन का हिस्सा बन गया।

 

पैस्ली प्रिंट :

पैस्ली प्रिंट की उत्पत्ति भारत और फ़ारस से हुई है। भारत में इसे आम की बूटी कहा जाता था। बाद में यह यूरोप पहुँचा और स्कॉटलैंड के Paisley शहर में मशहूर हुआ, जिससे इसका नाम पड़ा। आज यह डिज़ाइन साड़ियों, शॉल, बैंडाना और फैशन एक्सेसरीज़ में खूब इस्तेमाल होता है।

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