सपनों का शहर बना मुसीबत का शहर — बारिश ने रोका हर सफ़र

Mumbai, India - June 15, 2014: Big waves hitting the sea promenades when the weather turns towards monsoon in Mumbai. Kids getting splashed by the waves with Gateway of India in the background.

मुंबई, 20 अगस्त 2025 –
मुंबई में इस बार की अगस्त बारिश ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। शहर में अब तक हज़ार मिलीमीटर से ज़्यादा पानी गिर चुका है, जिससे मुंबई की सड़कें तालाब में बदल गई हैं और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। पिछले 24 घंटों में ही कई इलाकों में 200 मिमी से ज़्यादा बारिश दर्ज की गई है।

 यातायात पूरी तरह प्रभावित

लोकल ट्रेनें, जिन्हें मुंबई की लाइफ़लाइन कहा जाता है, घंटों तक ठप रहीं। सेंट्रल और हार्बर लाइन पर पानी भर जाने से कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा।

एयरपोर्ट पर भी उड़ानों में भारी देरी हुई, जिससे यात्रियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा।

सड़कों पर पानी भरने से गाड़ियाँ घंटों जाम में फँसी रहीं और लोग पैदल रास्ते ढूँढते नज़र आए।

बचाव अभियान

प्रशासन और आपदा प्रबंधन दल पूरी तरह सक्रिय हैं।

अब तक सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला गया है, जिनमें ट्रेन और मैनोरैल में फँसे यात्री भी शामिल हैं।

ठाणे और पालघर ज़िलों में नाव और रस्सी की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया गया।

जनजीवन पर असर

स्कूलों और कॉलेजों को बंद करने का आदेश दिया गया है।

कई दफ़्तरों ने कर्मचारियों से घर से काम करने की अपील की है।

रोज़मर्रा की ज़रूरी चीज़ों की सप्लाई पर भी असर पड़ रहा है।

प्रशासन की चुनौती

मुंबई महानगरपालिका (BMC) का कहना है कि पंपिंग स्टेशन लगातार काम कर रहे हैं और जल निकासी की प्रक्रिया तेज़ है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें राहत और बचाव कार्य में लगी हुई हैं।
फिर भी भारी बारिश ने शहर की तैयारी और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

 2005 की बाढ़ की यादें ताज़ा

कई लोग इस स्थिति की तुलना 2005 की भयानक बाढ़ से कर रहे हैं, जब मुंबई लगभग हफ्तों तक ठप हो गया था। इस बार भी हालत ऐसे ही दिख रहे हैं – सड़कों पर समंदर, ट्रेनों का ठप होना और लोगों की बेबसी।

 

मुंबई एक बार फिर यह साबित करती है कि जब बारिश बेकाबू हो जाती है तो देश की आर्थिक राजधानी भी असहाय दिखने लगती है। सवाल यही है कि हर साल दोहराई जाने वाली इस त्रासदी से शहर को बचाने के लिए ठोस कदम कब उठाए जाएंगे।

 

 

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