PM Modi और उनकी मां पर अभद्र टिप्पणी करने वाला युवक गिरफ्तार, राजनीतिक विवाद तेज

Rahul Gandhi Voter Adhikar Yatra Controversy: बिहार की राजनीति में नया तूफान खड़ा हो गया है। दरभंगा जिले के अतरबेल में वोटर अधिकार यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ अभद्र भाषा का इस्तेमाल किए जाने का मामला अब गरमा गया है।

सोशल मीडिया पर घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए भवानीपुर पंचायत के भपुरा निवासी रिजवी उर्फ राजा को गिरफ्तार कर लिया है।

कौन है रिजवी उर्फ राजा?

पुलिस जांच में सामने आया है कि रिजवी स्थानीय स्तर पर सक्रिय युवक है, जो पेठिया चौक पर पंचर की दुकान चलाता है। उसका किसी राजनीतिक दल से आधिकारिक संबंध नहीं है, लेकिन अक्सर वह सामाजिक और राजनीतिक आयोजनों में मौजूद रहता था और स्थानीय नेताओं का समर्थक माना जाता है। पुलिस रिकॉर्ड में उसके खिलाफ अब तक कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था।

पुलिस और साइबर जांच

सिटी एसपी अशोक कुमार ने बताया कि वीडियो फुटेज और साइबर जांच में साफ हुआ कि मंच से नारेबाजी करने वाला व्यक्ति रिजवी ही था। वीडियो में उसे ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ जैसे नारे लगाते और प्रधानमंत्री मोदी व उनकी मां के लिए अपशब्द बोलते हुए देखा गया। पुलिस ने अन्य संदिग्धों की भी पहचान शुरू कर दी है और जल्द और गिरफ्तारियां संभव हैं।

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सियासी तनाव के बीच बीजेपी का हमला

यह मामला अब पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है। बीजेपी ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव से सार्वजनिक माफी की मांग की है। उपमुख्यमंत्री विजय सिन्हा ने इसे बिहार की राजनीतिक मर्यादा को ठेस पहुँचाने वाला कृत्य बताया और कहा कि यह लालू-राबड़ी राज की अराजकता की याद दिलाता है।

विपक्ष ने दी सफाई

कांग्रेस ने साफ कहा है कि रिजवी का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है और उसे कांग्रेस का कार्यकर्ता बताना गलत है। to आरजेडी ने इस पूरे विवाद को बीजेपी की साजिश करार दिया। पार्टी नेताओं का कहना है कि विपक्ष को बदनाम करने के लिए बीजेपी ऐसे मुद्दे खड़ा कर रही है।

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आगामी चुनाव पर असर

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद 2025 में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव से पहले माहौल को और ज्यादा गरमा देगा। बीजेपी इस मुद्दे को विपक्ष की “नकारात्मक राजनीति” के रूप में पेश करेगी, जबकि कांग्रेस और आरजेडी इसे राजनीतिक हमला बताकर बचाव की रणनीति अपनाएंगी।
मतदाताओं पर इसका वास्तविक असर कितना पड़ेगा, यह आने वाले महीनों में स्पष्ट होगा, लेकिन फिलहाल यह मामला चुनावी बहस का अहम मुद्दा बन चुका है।

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