सात साल बाद पीएम मोदी की चीन यात्रा, तियानजिन में दिखी भारत-रूस-चीन की त्रिपक्षीय ताकत

SCO Summit in China 2025: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सोमवार को चीन के तियानजिन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में पहुंचे, जहां वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ मंच साझा करते नजर आए। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक स्तर पर अस्थिरता और क्षेत्रीय तनाव की स्थिति बनी हुई है।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर फोटो साझा कर लिखा, “तियानजिन में बातचीत का सिलसिला जारी। एससीओ शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी के साथ विचार-विमर्श किया।”

पुतिन से हुई मुलाकात

प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अलग से भी मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने ऊर्जा, रक्षा और रणनीतिक साझेदारी पर चर्चा की। पीएम मोदी ने एक्स पर लिखा, “राष्ट्रपति पुतिन से मिलना हमेशा खुशी की बात है।”

भारत और रूस के बीच लंबे समय से रक्षा और ऊर्जा क्षेत्र में गहरे संबंध रहे हैं। यूक्रेन युद्ध और पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच भी भारत ने रूस के साथ अपने रिश्ते बनाए रखे हैं।

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शी जिनपिंग से बातचीत

शिखर सम्मेलन की औपचारिक शुरुआत से पहले रविवार को प्रधानमंत्री मोदी ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। यह दोनों नेताओं की लगभग दस महीने बाद पहली बैठक थी।
सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान सीमा प्रबंधन प्रोटोकॉल पर हुई हालिया प्रगति पर चर्चा हुई और 3,500 किलोमीटर लंबी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर नए गश्त नियमों पर सहमति जताई गई। इसे चार साल से जारी तनाव के बाद रिश्तों में सुधार की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

सम्मेलन का मुख्य एजेंडा

एससीओ शिखर सम्मेलन का मुख्य ध्यान आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद जैसी “तीन बुराइयों” से निपटने पर केंद्रित है। इसके साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और एशिया में रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के मुद्दों पर भी चर्चा होगी।
सोमवार को एक समझौता हस्ताक्षर समारोह निर्धारित है, जिसके बाद सदस्य देशों की ओर से संयुक्त बयान जारी किया जाएगा।

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क्यों है यह यात्रा खास?

यह प्रधानमंत्री मोदी की सात साल में पहली चीन यात्रा है। भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और लद्दाख में लंबे समय से चल रहे तनाव के बाद इस यात्रा को दोनों देशों के रिश्तों को पटरी पर लाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
साथ ही, रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक राजनीति में बदलते समीकरणों के बीच भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि तियानजिन शिखर सम्मेलन भारत, चीन और रूस के बीच सहयोग को नई दिशा देने के साथ-साथ एशिया में बदलते भू-राजनीतिक हालात का संकेत भी देगा।

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