US Tariff War: चीन के तियानजिन शहर में हाल ही में संपन्न शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन ने भारत की विदेश नीति को लेकर वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। इस सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच गर्मजोशी भरी बातचीत और गहरी होती साझेदारी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई चर्चा छेड़ दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में मोदी और पुतिन के बीच की सहजता और मजबूत संवाद ने भारत-रूस संबंधों को नई मजबूती दी है। लेकिन इसने अमेरिका की बेचैनी भी बढ़ा दी है।
अमेरिका का बदला सुर
भारत और अमेरिका के बीच हालिया टैरिफ और व्यापारिक तनाव के बीच अब अमेरिकी वित्तमंत्री स्कॉट बेसेंट का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा, “भारत और अमेरिका दोनों महान देश हैं। यह रिश्ता जटिल है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच अच्छे संबंध हैं। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और मुझे विश्वास है कि अंत में हम साथ आएंगे।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब वॉशिंगटन ने हाल के महीनों में भारत पर रूसी तेल खरीद और व्यापार संतुलन को लेकर कई बार कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है।
SCO को बताया ‘दिखावा’
हालांकि, बेसेंट ने SCO समिट के महत्व को कम आंकते हुए इसे ‘दिखावटी सम्मेलन’ कहा। उनका कहना है कि भारत भले ही रूस और चीन से संवाद कर रहा हो, लेकिन मूल्य और सोच के स्तर पर वह अमेरिका के ज्यादा करीब है।
ट्रंप के सलाहकार का कड़ा रुख
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के व्यापारिक सलाहकार पीटर नवारो ने SCO में मोदी की सक्रियता को “शर्मनाक” बताते हुए कहा था कि भारत को रूस और चीन की बजाय अमेरिका के साथ रहना चाहिए। यह टिप्पणी दर्शाती है कि वॉशिंगटन भारत की बहुध्रुवीय कूटनीति से असहज है।
भारत की रणनीति स्पष्ट
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की ‘मल्टीपोलर डिप्लोमेसी’ उसकी स्वतंत्र विदेश नीति का मूल है। भारत किसी एक ध्रुव में बंधने के बजाय अमेरिका, रूस और चीन—सभी से अपने हितों के आधार पर संबंध बनाए रखता है। SCO समिट में मोदी की सक्रिय उपस्थिति इस नीति का ही विस्तार है, जिससे भारत अब एक स्वायत्त और निर्णायक शक्ति के रूप में उभर रहा है।