Delhi News: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बिहार मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) मामले में अहम आदेश जारी करते हुए कहा कि अब आधार कार्ड को भी वैध पहचान दस्तावेजों की सूची में शामिल किया जाएगा। कोर्ट ने इसे 12वें दस्तावेज़ के रूप में मान्यता दी है।
हालांकि, जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह साफ कर दिया कि आधार कार्ड को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना जाएगा। उन्होंने कहा कि आधार केवल निवास का प्रमाण है। इसके साथ ही चुनाव आयोग को यह अधिकार दिया गया है कि वह आधार कार्ड का सत्यापन कर उसकी वैधता सुनिश्चित कर सके। यह फैसला समाजवादी नेता योगेंद्र यादव द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान आया।
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का सवाल
इस फैसले के बाद कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आधार कार्ड की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा:
- “अगर आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो फिर नागरिकता का और क्या प्रमाण होगा?”
- “जिनके पास जन्म प्रमाण पत्र, पिता या दादा का कोई प्रमाण पत्र नहीं है, क्या उन्हें विदेशी घोषित कर दिया जाएगा?”
उन्होंने इसे आम जनता के लिए एक गंभीर और जटिल मुद्दा बताया और कहा कि करोड़ों भारतीयों के पास केवल आधार ही सबसे प्रमुख पहचान दस्तावेज है।
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उपराष्ट्रपति चुनाव पर टिप्पणी
इमरान मसूद ने उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर भी एनडीए पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि एनडीए में पहली बार बौखलाहट, खलबली और बेचैनी साफ नजर आ रही है, जो हमारे लिए बड़ी जीत है।
यह चुनाव केवल एक व्यक्ति का चुनाव नहीं, बल्कि देश की आत्मा को बचाने का चुनाव है। अगर कुछ लोगों की अंतरात्मा जाग जाएगी तो देश की आत्मा बच जाएगी।
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नेपाल के हालात पर प्रतिक्रिया
इमरान मसूद ने पड़ोसी देश नेपाल की स्थिति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि किसी भी देश में दमनकारी रवैया ज्यादा समय तक नहीं चल सकता। इसका नतीजा या तो अराजकता के रूप में निकलता है या फिर तख्तापलट की स्थिति बनती है।
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश स्पष्ट करता है कि आधार कार्ड को पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन यह नागरिकता तय करने का आधार नहीं होगा। इस फैसले ने जहां चुनाव आयोग के कामकाज को दिशा दी है, वहीं विपक्ष ने इसे लेकर नागरिकता के सवाल पर नई बहस छेड़ दी है।
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