Maharashtra Politics : महाराष्ट्र की राजनीति में लंबे समय बाद उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक साथ नज़र आए, लेकिन उनकी पहली साझेदारी उम्मीद के मुताबिक सफल नहीं हो सकी। बेस्ट एम्प्लॉयीज़ को-ऑपरेटिव क्रेडिट सोसायटी के चुनाव में दोनों नेताओं का समर्थन प्राप्त ‘उत्कर्ष पैनल’ एक भी सीट नहीं जीत सका।
चुनाव परिणाम बुधवार को घोषित हुए, जिसमें शशांक राव के पैनल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 21 में से 14 सीटों पर कब्जा जमाया। वहीं, महायुति समर्थित प्रसाद लाड पैनल ने 7 सीटें हासिल कीं। लेकिन सबसे बड़ा झटका उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और राज ठाकरे की महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) को लगा, जिनका संयुक्त पैनल पूरी तरह हार गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चुनाव से पहले दोनों दलों में सीट बंटवारे का फॉर्मूला तय हुआ था। उद्धव ठाकरे गुट ने 18 सीटों पर और मनसे ने 2 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। इसके बावजूद नतीजों में ‘ठाकरे ब्रदर्स’ का गठजोड़ पूरी तरह साफ हो गया।
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इस हार के साथ ही बेस्ट क्रेडिट सोसायटी (पटपेढ़ी) में ठाकरे गुट का 9 साल पुराना दबदबा खत्म हो गया है। माना जा रहा है कि यह झटका आगामी मुंबई नगर निगम (बीएमसी) चुनावों की पृष्ठभूमि में बड़ा असर डाल सकता है। दरअसल, शिवसेना-यूबीटी और मनसे आने वाले बीएमसी चुनाव में साथ मिलकर लड़ने की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं। ऐसे में बेस्ट सोसायटी चुनाव में हार ने दोनों दलों की संगठनात्मक क्षमता और प्रभाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
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राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस नतीजे से साफ संकेत मिलता है कि अब केवल ठाकरे परिवार का नाम भर ही जीत की गारंटी नहीं रहा। ज़मीनी स्तर पर मजबूत संगठन, उम्मीदवार चयन और जनता से सीधा जुड़ाव ही भविष्य की राजनीति में निर्णायक भूमिका निभाएगा।
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