ट्रंप ने भारत पर लगाया 50% टैरिफ, अमेरिकी अर्थशास्त्री बोले– अपने ही पैर पर मारी कुल्हाड़ी

Trump Tariff on India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारतीय निर्यात पर 50% टैरिफ लगा दिया है। इसमें से 25% टैरिफ पहले से ही लागू था, जबकि रूस से तेल खरीद जारी रखने की सजा के तौर पर अतिरिक्त 25% शुल्क आज से प्रभावी हो गया है। इसके साथ ही भारत अब सबसे ज्यादा US Tariff झेलने वाले देशों की लिस्ट में ब्राजील के साथ शामिल हो जाएगा

दो चरणों में घोषित अमेरिका का ये टैरिफ भारत के लगभग दो-तिहाई वस्तु व्यापार को कवर करते हैं, जो इसका सबसे बड़ा निर्यात बाजार है. इससे खासतौर पर 12 प्रमुख सेक्टर्स पर बड़ा असर देखने को मिल सकता है और इसे लेकर प्रख्यात अर्थशास्त्री और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेफरी सैश ने कड़ी आलोचना की है।

अमेरिका का नया दबाव
विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय भारत को दबाव में लाने की कोशिश है ताकि वह रूस से ऊर्जा खरीद कम करे। लेकिन भारत ने साफ किया है कि उसकी ऊर्जा नीति उसके राष्ट्रीय हितों पर आधारित है और किसी भी बाहरी दबाव में बदलाव नहीं होगा।

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जेफरी सैश की कड़ी आलोचना
अमेरिका के प्रख्यात अर्थशास्त्री और कोलंबिया यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जेफरी सैश ने ट्रंप के इस कदम को “आत्मघाती” बताया है।
उनका कहना है कि—

“ट्रंप अमेरिका को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। यह कदम न केवल अमेरिकी कंपनियों को कमजोर करेगा बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में अमेरिका को अलग-थलग भी कर देगा।”

उन्होंने इसे अमेरिकी विदेश नीति का “सबसे बेवकूफी भरा कदम” करार दिया और कहा कि इससे भारत जैसे भरोसेमंद साझेदार से अमेरिका का रिश्ता बिगड़ सकता है।

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भारत की स्थिति
भारत के लिए यह टैरिफ बड़ा झटका है, क्योंकि लगभग 45 अरब डॉलर के निर्यात पर सीधा असर पड़ेगा। लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि भारत इस चुनौती का सामना अन्य बाजारों और BRICS देशों के साथ गहरे आर्थिक संबंधों के जरिए कर सकता है।

वैश्विक असर
सैश का मानना है कि ट्रंप का यह फैसला BRICS देशों—भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका—को और करीब लाने का काम करेगा। इससे अमेरिका की रणनीतिक स्थिति कमजोर हो सकती है और वह एशिया में अपना सबसे मजबूत लोकतांत्रिक सहयोगी भी खो सकता है।

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