Ayodhya News: भूटान के प्रधानमंत्री अपनी पत्नी संग अयोध्या पहुंच चुके हैं।आज यानी शुक्रवार की सुबह उनका विमान अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में उतरा।
Ayodhya News: भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग टोबगे अपनी पत्नी के साथ चार दिवसीय भारत यात्रा पर आए हैं। आज यानी शुक्रवार की सुबह उनका विमान अयोध्या के महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट में उतरा और इस दौरान उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही और जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। रेड कार्पेट बिछाकर उन्हें सम्मान दिया गया, जो उनके भारत-भूटान संबंधों की गहराई को दर्शाता है।
चार घंटे अयोध्या में रहेंगे भूटान के पीएम
प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय भी दौरे की निगरानी कर रहे हैं. लगभग चार घंटे के प्रवास में वे भगवान श्रीरामलला, हनुमानगढ़ी और अन्य प्रमुख मंदिरों में दर्शन-पूजन करेंगे. जिला प्रशासन की ओर से रेड कार्पेट पर उनका स्वागत किया जाएगा. उनके सम्मान में विशेष दोपहर भोज का आयोजन होगा, जिसमें प्रदेश सरकार और केंद्र के मंत्री भी शामिल हो सकते हैं. दर्शन-पूजन के बाद भूटानी प्रधानमंत्री दोपहर लगभग 1:30 बजे अयोध्या से दिल्ली के लिए रवाना होंगे.उनका यह दौरा भारत और भूटान के बीच गहरी होती मित्रता और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का प्रतीक है. उन्होंने बीते दिन बिहार में नालंदा विश्वविद्यालय का दौरा किया था. बिहार के ही राजगीर में स्थित रॉयल भूटान मंदिर का भव्य लोकार्पण किया था.
कूटनीतिक स्थितियों में महत्वपूर्ण होगा दौरा
भारत-भूटान सम्बन्ध हमेशा से मित्रतापूर्ण रहे है। भारत-भूटान सम्बन्धों की शुरूआत 1865 ई. की सिनचुला संधि से हुई। इस संधि के द्वारा भूटान को भारत की एक रियासत का दर्जा मिला था। यह संधि भूटान और ब्रिटिश भारत के मध्य हुई थी। हालांकि भूटान एक पर्वतीय राज्य है और घाटियों में बसा हुआ है। यहां के लोग बौद्ध धर्मावलम्बी है। इस क्षेत्र में चाइना का दखल से न केवल भूटान बल्कि उतरी बंगाल, असम व अरूणाचल प्रदेश भारत से कट सकता है।
इसके कारण सामरिक दृष्टि से भूटान का भारत के लिए खास महत्व है। भारत सरकार ने इसके चलते भूटान के प्रधानमंत्री दोसा शेरिंग टोबगे को शासकीय सम्मान देने का निश्चय किया है। भारत आगमन के साथ उनका अयोध्या दौरा भी विशेष महत्व रखता है। रामलला के दर्शन के उपरांत ऐतिहासिक सम्बन्धों के साथ सांस्कृतिक सम्बन्ध भी प्रगाढ़ होंगे। दरअसल सनातनी परम्परा में हिन्दू-बौद्ध-सिक्ख व जैन धर्मावलंबी सभी शामिल हैं।