GST Rate Cut : केंद्र सरकार ने उपभोक्ताओं और किसानों को बड़ी राहत देते हुए करीब 400 वस्तुओं और सेवाओं पर जीएसटी दरों में कटौती की है। इनमें सबसे अहम फैसला दूध और डेयरी उत्पादों से जुड़ा है। अब घी, पनीर और कई अन्य उत्पाद जीएसटी से पूरी तरह मुक्त हो गए हैं।
सरकार का कहना है कि इस निर्णय का सीधा लाभ देश के 8 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को मिलेगा, विशेष रूप से उन लोगों को, जो अपनी आजीविका पशुपालन और डेयरी पर आधारित रखते हैं।
भारत सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश
भारत वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। वित्तीय वर्ष 2023-24 में यहां 239 मिलियन टन दूध का उत्पादन हुआ, जो विश्व उत्पादन का लगभग 24 प्रतिशत है। यही कारण है कि डेयरी क्षेत्र राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5.5 प्रतिशत तक का योगदान देता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वर्ष 2024 में भारतीय डेयरी बाजार का आकार 18.98 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा। ऐसे में जीएसटी में कमी इस क्षेत्र को नई गति देने का काम करेगी।
पहले टैक्स, अब राहत
- पहले अल्ट्रा हाई टेम्परेचर (UHT) दूध पर टैक्स लगाया जाता था, जिसे अब पूरी तरह से जीएसटी से मुक्त कर दिया गया है।
- प्लांट-बेस्ड दूध जैसे बादाम, सोया और ओट्स दूध पर पहले 12% से 18% तक कर देना पड़ता था, जिसे घटाकर केवल 5% कर दिया गया है।
- पनीर पर भी बड़ी राहत दी गई है। पहले जहां खुले पनीर पर कोई टैक्स नहीं था, वहीं पैक्ड और लेबल वाले पनीर पर जीएसटी देना पड़ता था। अब इस पर भी कर घटा दिया गया है।
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किसानों और उपभोक्ताओं को लाभ
सरकार का कहना है कि इस फैसले से ग्रामीण भारत के छोटे, सीमांत और भूमिहीन किसानों को सीधा लाभ होगा। दूध और दूध उत्पादों की मांग बढ़ेगी, जिससे पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी। साथ ही, उपभोक्ताओं को भी सस्ते दाम पर गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिल सकेंगे।
डेयरी सेक्टर को नई मजबूती
विशेषज्ञों के अनुसार, जीएसटी में कमी से न केवल परिचालन लागत कम होगी, बल्कि मिलावट पर भी अंकुश लगेगा। इससे भारतीय डेयरी उत्पाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
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सरकार का बयान
सरकार ने कहा कि यह सुधार 8 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को राहत देगा। कम कराधान से दूध और उससे जुड़े उत्पादों की खपत बढ़ेगी और पशुपालकों को बेहतर आय सुनिश्चित होगी। साथ ही, यह कदम देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में भी योगदान देगा।
यह फैसला न केवल किसानों और उपभोक्ताओं को राहत देगा, बल्कि भारत को डेयरी सेक्टर में वैश्विक स्तर पर और भी सशक्त बनाने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
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