S. Jaishankar Meet Johann Wadephul: भारत-जर्मनी संबंधों को नई दिशा देते हुए बुधवार को दिल्ली में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और जर्मन विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल के बीच अहम वार्ता हुई। इस दौरान दोनों देशों ने न केवल आर्थिक सहयोग को बढ़ाने का संकल्प लिया बल्कि वैश्विक शांति, खासकर यूक्रेन संकट में भारत की भूमिका को लेकर खुलकर चर्चा की।
ट्रेड डील और आर्थिक सहयोग
वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने पर विशेष बल दिया।
- जर्मन विदेश मंत्री ने भरोसा जताया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आने वाले महीनों में संभव है।
- वाडेफुल ने कहा, “पिछले साल भारत-जर्मनी का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 50 बिलियन यूरो का रहा। हमारा लक्ष्य इसे दोगुना करना है और जर्मनी इसके लिए पूरी ताकत लगाएगा।”
- उन्होंने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि अगर अन्य देश व्यापार में बाधाएं डालते हैं तो हमें उन्हें कम करके उसका जवाब देना चाहिए।
- जयशंकर ने भी इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता दोहराई।
यूरोप में शांति के लिए भारत से उम्मीद
जर्मन विदेश मंत्री ने खुलकर कहा कि यूरोप में शांति बहाली के लिए भारत का सहयोग महत्वपूर्ण है।
- उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ने हाल ही में राष्ट्रपति पुतिन से मुलाकात के दौरान यूक्रेन में शीघ्र शांति समझौते पर जोर दिया था, जो हमारे लिए बेहद अहम है।”
- वाडेफुल ने अपील की कि भारत अपने रूस के साथ संबंधों का उपयोग यूरोप में शांति स्थापित करने के लिए करे।
- उन्होंने कहा, “शांति सुरक्षा, स्वतंत्रता और समृद्धि की नींव है। सुरक्षा हमेशा भविष्य के लिए एक चुनौती बनी रहेगी।”
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गुटनिरपेक्ष भारत की तारीफ
वाडेफुल ने भारत के ऐतिहासिक गुटनिरपेक्ष रुख की प्रशंसा की।
- उन्होंने कहा, “जब मैं युवा था और पढ़ाई कर रहा था तब भारत को एक गुटनिरपेक्ष राष्ट्र के रूप में जाना जाता था। यह उसकी पहचान का हिस्सा रहा है।”
- उन्होंने माना कि आज भी भारत एक अलग स्थिति में खड़ा है, जबकि यूरोप को रूस के साथ टकराव का सामना करना पड़ रहा है।
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भारत-जर्मनी संबंधों पर दृष्टिकोण
- जर्मन विदेश मंत्री ने कहा, “भारत हमारे लिए पूरे एशिया के बराबर है और जर्मनी व यूरोपीय संघ भी भारत के लिए समान महत्व रखते हैं।”
- उन्होंने जोड़ा कि दोनों देशों के पास अपनी-अपनी राजनीतिक प्राथमिकताएं हैं, लेकिन लोकतांत्रिक सिद्धांतों और नियामक ढांचे पर दोनों पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
- वार्ता में इस बात पर भी जोर दिया गया कि भविष्य में दोनों पक्ष एक-दूसरे के बाज़ार में निवेश और भागीदारी को और सरल बनाने की दिशा में काम करेंगे।
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